शुक्रवार, १३ जून, २००८

.... एक भजन .. माझ्या आवडीचे ..

जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
मिल जाए तरुवर की छाया
सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
मिल जाए तरुवर की छाया
ऐसा ही सुख मेरे मन् को मिला है
मैं जब से शरण तेरी आया , मेरे राम

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
मिल जाए तरुवर की छाया

भटका हुआ मेरा मन् था कोई मिल न रहा था सहारा - 2
लहेरों से लड़ती हुई नाव को - 2
जैसे मिल न रहा हो किनारा
मिल न रहा हो किनारा
उस लड़खादाती हुई नाव को जो
किसी ने किनारा दिखाया

ऐसा ही सुख मेरे मन् को मिला है
मैं जब से शरण तेरी आया , मेरे राम

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
मिल जाए तरुवर की छाया

शीतल बनी आग चंदन के जैसी
राघव कृपा हो जो तेरी - 2
उजियाली पूनम की हो जाए रातें जो थी अमावस अँधेरी - 2
जो थी अमावस अँधेरी
युग युग से प्यासी मरुभूमि ने जैसे
सावन का संदेस पाया

ऐसा ही सुख मेरे मन् को मिला है
मैं जब से शरण तेरी आया , मेरे राम

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
मिल जाए तरुवर की छाया

जिस राह की मंजिल तेरा मिलन हो
उस पर कदम मैं बाधाओं - 2
फूलों में कहारों में पतझड़ बहारों में मैं ना कभी डगमगाऊँ - 2
मैं ना कभी डगमगाऊँ
पानी के प्यासे को तकदीर ने जैसे
जी भर के अमृत पिलाया - 2

ऐसा ही सुख मेरे मन् को मिला है
मैं जब से शरण तेरी आया , मेरे राम

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
मिल जाए तरुवर की छाया

ऐसा ही सुख मेरे मन् को मिला है
मैं जब से शरण तेरी आया , मेरे राम

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
मिल जाए तरुवर की छाया

ओनलाईन ऐका

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