बुधवार, ११ जून, २००८

अर्ज किया है ....

जिसे कोयल समझा वो कौआ निकला...
दोस्ती के नाम पे हवा निकला...
कभी जो रोका करते थे हमे शराब पिने से....
आज उनकेही जेब से पौआ निकला ..!


मेरे आंखो में ख्वाब फिर से दे गया कोई ..
बुझती हुई सांसो को आग फिर से दे गय कोई ...
क्या यही महोब्बत है..?
या फिर से "मामु" बना गया कोई ...!!


वो आज भी हमें देख के मुस्कुराते है...
वो आज भी हमें देख के मुस्कुराते है ....
ये तो उनके बच्चे कमिने है,
जो हमें "मामा- मामा" कहके बुलाते है ..!